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Monday, April 25, 2011

चली आना..

गुरबत जो करनी हो हमसे तो बिन बुलाए चली आना,
हो जो दर्द तेरा मुझे दे जाना पर बिन बताये चली जाना,

शिकवा जो कभी हो हमसे तो बिन बुलाए कह जाना,
गलतियों पे मेरी सजा-ऐ-मौत सुना हिसाब कर जाना,

मोहब्बत जो आये कभी मुझ अजनबी पर तो चली आना,
बस एक मुस्कराहट दे मेरी मोहब्बत को अमर कर जाना,

बहाना जो ना हो तो बिना किसी बहाने के चली आना,
जो लौटने का मन हो तो हिज्र से अच्छी कोई मौत दे जाना..!!

Monday, December 20, 2010

कभी तो मुस्कुराओ..

कभी तो मुस्कुराओ 
क्यूँ रहते हरदम ग़मगीन 
बोझिल करते फिजा हसीं
आँखों के नम कोरों से 
ख़ुशी के अश्रु छलकाओ 
कभी तो मुस्कुराओ

छोटी खुशियों को कर नज़रंदाज़ 
ढूँढ़ते वही जो नहीं पास 
मृगमरीचिका से उबर
यथार्थ धरातल पर आओ 
कभी तो मुस्कुराओ

अंधेरो के साथ है रौशनी भी 
दुःख नही तो क्या ख़ुशी 
इस बात को समझ 
जीवन में अपनाओ 
कभी तो मुस्कुराओ

असंख्य कुसुम खिलाती हँसी तुम्हारी 
मुस्कान चेहरे पे लगती न्यारी 
स्वयं प्रसन्न होकर ही
दूसरो को मुस्कान दे पाओ 
इसलिए हरदम मुस्काओ

Thursday, September 2, 2010

Friday, September 26, 2008

Thursday, January 17, 2008

शेरो शायरी

1.
बड़ा अरमान था आपसे मिलने का,
शिकवा है आपके खामोश रहने का,
दीवानगी इससे बड़कर क्या होगी,
आज भी इंतजार है आपके मुस्कराने का।

२.
ये लम्हें साथ हॊ न हॊं,
कल में आज जैसी बात हॊ ना हॊ।
जिंदगी के हसीन लम्हें साथ रहेंगे,
चाहे सारी उम्र हमारी मुलाकात हॊ न हॊ।

३.हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है
नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया ।
४.क्या सोचते हो?
हर रिश्ते का अंज़ाम शायद यही होता है,
बनता है,फलता-फूलता है,
बिगडता है और टूट जाता है,
क्यूँ करे किसी से, शिकायत कोई
हर रिश्ता एक ज़ख्म दे जाता है,
हाँ लेकिन....
हर ज़ख्म की सूरत कुछ अलग होती है,
तभी तो रात भर नही सो पाया,
यह सोचते हुए,
रिश्तो की नीव जो कभी,
बहुत मज़बूत दिखायी देती है॥
उसकी जड मे भी,इतनी नमी क्यूँ होती है........