कभी तो मुस्कुराओ
क्यूँ रहते हरदम ग़मगीन
बोझिल करते फिजा हसीं
आँखों के नम कोरों से
ख़ुशी के अश्रु छलकाओ
कभी तो मुस्कुराओ
छोटी खुशियों को कर नज़रंदाज़
ढूँढ़ते वही जो नहीं पास
मृगमरीचिका से उबर
यथार्थ धरातल पर आओ
कभी तो मुस्कुराओ
अंधेरो के साथ है रौशनी भी
दुःख नही तो क्या ख़ुशी
इस बात को समझ
जीवन में अपनाओ
कभी तो मुस्कुराओ
असंख्य कुसुम खिलाती हँसी तुम्हारी
मुस्कान चेहरे पे लगती न्यारी
स्वयं प्रसन्न होकर ही
दूसरो को मुस्कान दे पाओ
इसलिए हरदम मुस्काओ
Tute Dil ka har Tukra, ye Kehta hai, Pyaar na karna, Pyaar to bas ek dhoka hai.................
Monday, December 20, 2010
Thursday, September 2, 2010
Friday, September 26, 2008
Thursday, January 17, 2008
शेरो शायरी
1.
बड़ा अरमान था आपसे मिलने का,
शिकवा है आपके खामोश रहने का,
दीवानगी इससे बड़कर क्या होगी,
आज भी इंतजार है आपके मुस्कराने का।
२.
ये लम्हें साथ हॊ न हॊं,
कल में आज जैसी बात हॊ ना हॊ।
जिंदगी के हसीन लम्हें साथ रहेंगे,
चाहे सारी उम्र हमारी मुलाकात हॊ न हॊ।
३.हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है
नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया ।
४.क्या सोचते हो?
हर रिश्ते का अंज़ाम शायद यही होता है,
बनता है,फलता-फूलता है,
बिगडता है और टूट जाता है,
क्यूँ करे किसी से, शिकायत कोई
हर रिश्ता एक ज़ख्म दे जाता है,
हाँ लेकिन....
हर ज़ख्म की सूरत कुछ अलग होती है,
तभी तो रात भर नही सो पाया,
यह सोचते हुए,
रिश्तो की नीव जो कभी,
बहुत मज़बूत दिखायी देती है॥
उसकी जड मे भी,इतनी नमी क्यूँ होती है........
बड़ा अरमान था आपसे मिलने का,
शिकवा है आपके खामोश रहने का,
दीवानगी इससे बड़कर क्या होगी,
आज भी इंतजार है आपके मुस्कराने का।
२.
ये लम्हें साथ हॊ न हॊं,
कल में आज जैसी बात हॊ ना हॊ।
जिंदगी के हसीन लम्हें साथ रहेंगे,
चाहे सारी उम्र हमारी मुलाकात हॊ न हॊ।
३.हस्सी ने लबों पे तिरकना छोड़ दिया है
ख्वाबों ने पलकों पे आना छोड़ दिया है
नही आती अब तो हिचकियाँ भी,
शायद आप ने भी याद करना छोड़ दिया ।
४.क्या सोचते हो?
हर रिश्ते का अंज़ाम शायद यही होता है,
बनता है,फलता-फूलता है,
बिगडता है और टूट जाता है,
क्यूँ करे किसी से, शिकायत कोई
हर रिश्ता एक ज़ख्म दे जाता है,
हाँ लेकिन....
हर ज़ख्म की सूरत कुछ अलग होती है,
तभी तो रात भर नही सो पाया,
यह सोचते हुए,
रिश्तो की नीव जो कभी,
बहुत मज़बूत दिखायी देती है॥
उसकी जड मे भी,इतनी नमी क्यूँ होती है........
Wednesday, December 12, 2007
वो नही है .....ग़ज़ल

Ahsaas hai mujhe ki woh ab nahi hai
Nahi hai wo mere sang nahi hai॥
Door toh woh tha hee ॥ Magar ..
Magar ab woh hai hee nahi hai !!
Hai nahi koi umeed fir bhi .. kyun…
Nazar meri kuch dhoondh rahi hai ?
Dhoondhna chahti hai kyun ab bhi woh..
uske lavzo me mera naam jo ab wahan nahi hai !
Wahan kuch surkh ho gaya hai ya..
Yahan kuch khalti kami hai ?
Khalti hai nazar mujhe meri .. Jo
Harr taraf teri hi nazar dhoondh rahi hai !
Mujhe ahsaas hai ki teri hansi mein ..
Hai chhupi meri hansi hai...
Subscribe to:
Posts (Atom)








